Unnao Case Update, उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे कुलदीप सेंगर को मिली जमानत के खिलाफ देशभर में नाराज़गी बढ़ रही है। दिल्ली में कांग्रेस नेता मुमताज पटेल और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। जानिए पूरा मामला।

उन्नाव केस पर क्यों भड़का विरोध?
उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद देशभर में आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी फैसले के खिलाफ शनिवार को दिल्ली में संसद भवन के आसपास कांग्रेस नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
इस दौरान कांग्रेस नेता मुमताज पटेल और महिला अधिकारों के लिए काम कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना समेत कई लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि संसद क्षेत्र में प्रदर्शन की अनुमति नहीं होती, इसलिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
दिल्ली में क्या हुआ प्रदर्शन के दौरान?
शनिवार शाम करीब चार बजे प्रदर्शनकारी संसद भवन के पास सड़क पर बैठकर नारेबाज़ी करने लगे। पुलिस ने लाउडस्पीकर से समझाने की कोशिश की कि यह इलाका धरने के लिए तय नहीं है, लेकिन जब लोग हटने को तैयार नहीं हुए तो उन्हें हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को तुरंत रद्द किया जाए क्योंकि इससे पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
प्रदर्शनकारियों की आपत्ति क्या है?
कांग्रेस नेताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि:
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इतने गंभीर अपराध में दोषी को जमानत मिलना गलत संदेश देता है।
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इससे पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।
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प्रभावशाली लोगों को राहत मिलने से पीड़ितों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ता है।
उनका आरोप है कि ऐसे मामलों में कठोर रुख अपनाया जाना चाहिए ताकि समाज में न्याय का भरोसा बना रहे।
हाईकोर्ट ने जमानत देते समय क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2017 के दुष्कर्म मामले में कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए जमानत दी है। हालांकि अदालत ने यह शर्त रखी है कि वह पीड़िता के घर से पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा।
साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सेंगर को जमानत नहीं मिली है, इसलिए उस केस में वह अब भी जेल में रहेगा।
पीड़िता की मां सुप्रीम कोर्ट क्यों जा रही हैं?
पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से ही न्याय की आखिरी उम्मीद है। इससे पहले वह योगिता भयाना और अन्य महिला संगठनों के साथ हाईकोर्ट के बाहर भी विरोध कर चुकी हैं।
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी?
सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। एजेंसी का कहना है कि:
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यह मानना गलत है कि विधायक पॉक्सो कानून के तहत पब्लिक सर्वेंट नहीं होता।
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सेंगर ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया, इसलिए उस पर सख्त प्रावधान लागू होने चाहिए।
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अपराध के समय वह एक संवैधानिक पद पर था, जो जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ाता है।
- Supreme Court of India (Official Website)
पीड़िता की सुरक्षा को लेकर सीबीआई की चिंता
सीबीआई ने अदालत को बताया कि सेंगर एक प्रभावशाली और संसाधन संपन्न व्यक्ति है और उसकी रिहाई से पीड़िता और उसके परिवार को खतरा हो सकता है। एजेंसी का तर्क है कि सिर्फ लंबे समय तक जेल में रहने को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता, खासकर ऐसे संगीन अपराधों में। (aaj tak)
निष्कर्ष(Unnao Case Update)
कुलदीप सेंगर की जमानत का मुद्दा अब सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। एक तरफ अदालत का फैसला है तो दूसरी तरफ पीड़िता की सुरक्षा और न्याय की भावना से जुड़ा सवाल। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
Credit: YT Channel
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